Bookory

अनेकान्त : (डॉ. आईदान सिंह भाटी)

शिवमूर्ति  जी के साथ मेरी पहली भेंट राजस्थान के कस्बे श्रीडूंगरगढ में हुई थी, जहां संभवतः राजस्थान साहित्य अकादमी का आंचलिक समारोह था और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति उसकी आयोजक थी। कवि श्याम महर्षि के साथ आयोजन सहयोगी थे चेतन स्वामी और मालचंद तिवाडी। उस कस्बे में हिन्दी की विभूति राजेन्द्र यादव का आगमन हुआ था। […]

शिवमूर्ति की स्वीकृति का बैंड-बाजा : (दयानंद पांडेय)

चंद्रधर  शर्मा गुलेरी के बाद हिंदी कहानी में सब से कम लिख कर अगर कोई दूसरा नाम मुझे सूझता है तो वह नाम है ज्ञानरंजन का। तीसरा नाम है शिवमूर्ति और चौथा नाम है उदय प्रकाश का। ज्ञानरंजन के पास तो गुलेरी की तरह एक उपन्यास भी नहीं है। उदय प्रकाश ने तो कम लिख […]

देवि माँ सहचरि प्राण : (सुशील सिद्धार्थ )

लमही पत्रिका के शिवमूर्ति विशेषांक के लिए इसके अतिथि सम्पादक सुशील सिद्धार्थ ने मेरी मित्र शिवकुमारी जी का साक्षात्कार लिया था जो पाठकों के लिए प्रस्तुत है- देवि मां सहचरि प्राण ! सचमुच, उस समय कबीर की ये पंक्तियां मन में जाग गईं: ’तू कहता कागद की लेखी मैं कहता आंखिन की देखी।’ और मु-हजये […]

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