‘गोदान’ के पाठ में संशोधन की जरूरत’ : (शिवमूर्ति)
31 जुलाई 2014 को प्रेमचंद की स्मृति में हिंदी संस्थान लखनऊ द्वारा मुझे ‘गोदान’ पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया तो खुशी हुई कि इसी के चलते इस कालजयी उपन्यास को दोबारा पढ़ने का अवसर मिलेगा। बी.ए. करने के दौरान पढ़ा था कभी। अब कथानक की धुंधली-सी स्मृति ही शेष थी। घर में खोजा तो […]







