Bookory

जंग जारी है : (शिवमूर्ति)

उपन्यास अंश……….. आज गांवों में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। पुराने मूल्यों, मान्यताओं और मान-मर्यादा के मानदंड बदल गए हैं, बदल रहे हैं। अर्थ-लिप्सा गांवों को भी अपने शिकंजे में कस रही है…. गांवों के नाम पर आने वाली सरकारी सहायता सड़क, अस्पताल, पंचायत भवन आदि के निर्माण की धनराशि की निर्लज्जतापूर्वक बंदरबांट की […]

तर्पण (उपन्यास) का एक अंश : (शिवमूर्ति)

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश :- तर्पण भारतीय समाज में सहस्राब्दियों से शोषित,दलित और उत्पीड़ित समुदाय के प्रतिरोध एवं परिवर्तन की कथा है। इसमें एक तरफ कई-कई हजार वर्षों के दुःख, अभाव और अत्याचार का सनातन यथार्थ है तो दूसरी तरफ दलितों के स्वप्न, संघर्ष और मुक्ति चेतना की नई वास्तविकता। तर्पण में न […]

आखिरी छलांग

यह उपन्यास सर्वप्रथम ‘नया ज्ञानोदय’ के जनवरी २००८  के अंक में सम्पूर्ण रूप से  प्रकाशित हुआ था।      भारत के गाँव प्रेमचन्द और फडि़स्वरनाथ ‘रेणु’ की कथाओं में आये गाँवों से बहुत बदल गए हैं। वर्तमान गाँव के जनजीवन पर केन्द्रित मेरे लिखे जा रहे उपन्यास ‘पगडंडियां’ का एक अंश जो युग तेवर साहित्यिक पत्रिका […]

‘पगडंडिया’ : (शिवमूर्ति)

उपन्यास का अंश इतने सुन्दर लड़के का ऐसा दागी नाम- चोरवा। .       दो एक बार उस टोले के लड़कों से सुना था- छत्रधारी सिंह के घर कहीं से एक गोबर-सानी करने वाली औरत आयी है। उसके साथ उसका ग्यारह बारह साल का बेटा भी है। उसी को सब चोरवा कह कर बुलाते हैं। . […]

‘त्रिशूल’ : (वीरेन्द्र मोहन)

पाठकों के लिए शिवमूर्ति के उपन्यास ‘त्रिशूल’ पर वरिष्ठ आलोचक वीरेन्द्र मोहन के आलेख के कुछ अंश :- त्रिशूल की कहानी एक ओर हिन्दु-मूस्लिम साम्प्रदायिकता के अनेक पक्षों का उद्‌घाटन करती है तो दूसरी ओर हिन्दू समाज के जातिवादी ओर बिरादरीवादी मुखौटे का उद्‌घाटन करती है। जातिवाद की अनेक पर्तें यहाँ एक-एक कर खुलती जाती […]

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